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कोविड-19 महामारीके दौरान बिहार में समावेशी शिक्षा की स्थिति (Inclusive Education Status in Bihar during COVID-19 Pandemic)

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यह सर्वविदित है कि 1 अप्रैल 2010 को पूरे भारत में शिक्षा अधिकार कानून, 2009 लागू हुआ जिसके जरिये 6 से 14 साल के बच्चों को संवैधानिक रूप से शिक्षा का मौलिक अधिकार हासिल हुआ। 2010 में ही राइट टू एजुकेशन फोरम (आरटीई फोरम) का राष्ट्रीय स्तर पर इस इरादे से गठन किया गया था कि इस कानून के बारे में आम लोगों को जागरूक किया जा सके, जमीनी स्तर पर इस कानून के क्रियान्वयन का जायजा लिया जा सके और आम लोगों की अपेक्षाओं को सरकार के साथ भी साझा किया जा सके। राइट टू एजुकेशन फोरम, बिहार भी देश भर के बीस राज्यों में सक्रिय अलग-अलग राज्य फोरम में से एक है और राज्यव्यापी स्तर पर निरंतर शिक्षा का अधिकार अभियान चलाता रहा है।
आस्था मानसिक एवं शारीरिक समेत विकलांगता के विभिन्न पहलुओं पर राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली देश की एक ख्यात एवं अग्रणी संस्था है और शिक्षा अधिकार के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटक समावेशिता (इंक्लूसिवनेस) पर पिछले तीन दशकों से विशेष रूप से काम कर रही है। समाज के भीतर विकलांगता और समावेशिता जैसे संवेदनशील मसले पर आज भी खुल कर बात नहीं होती। शायद इस मुद्दे पर अभी भी व्यापक और तार्किक एवं व्यवहार गत समझ बननी बाकी है। आस्था इस मसले पर राष्ट्रीय और कई राज्यों में जन जागरूकता और सोच-समझ विकसित करने के लिए गंभीर जमीनी काम कर रहा है।
बिहार के 5 जिलों में किए गए गहन सर्वेक्षण पर आधारित प्रस्तुत रपट में बिहार के भीतर कोविड काल में समावेशी शिक्षा के हालात और चुनौतियों पर चर्चा की गई है।
इस प्रक्रिया में आस्था की संस्थापक, ख्यात रंगकर्मी और फोरम के राष्ट्रीय परिषद की वरिष्ठ सदस्य के बतौर आरटीई फोरम की स्थापना के समय से शिक्षा अधिकार अभियान में शामिल राधिका एम. अल्काजी ने पूरे शोध की दिशा निर्धारित करने के साथ-साथ नाजुक मौकों पर राह दिखाई। शोधकर्ता ऋचा ने सर्वे के दौरान साथियों से लगातार बातचीत करते हुए सर्वे पूरा करवाने और पूरी रिपोर्ट बनाने में अहम भूमिका निभाई। आरटीई फोरम, बिहार के पांचों जिला प्रतिनिधियों – सुरेंद्र कुमार (समस्तीपुर), शशि भूषण प्रसाद (मोतिहारी), सूरज गुप्ता (कटिहार), राम कृष्ण (मुजफ्फरपुर), दिनेश कुमार (पटना) ने पूरी सजगता और तत्परता के साथ कोविड-काल के दौरान भी तमाम अनदेखी अबूझ मुश्किलों से जूझते हुए सर्वे कार्य को पूरा किया। आरटीई फोरम, बिहार के प्रांतीय संयोजक डॉ. अनिल कुमार राय और सह-संयोजक राजीव रंजन ने लंबे समय तक चले इस कामकाज के दौरान समन्वय स्थापित करते हुए हर कदम पर साथियों को नेतृत्व प्रदान किया। स्कोर (स्टेट कलेक्टिव ऑन राइट टू एजुकेशन), उत्तर प्रदेश के संयोजक संजीव सिन्हा ने काम के दौरान हुई ऑनलाइन बैठकों में कई महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए।

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